हर पाठक और हर टिपण्णी प्रेषक का मै धन्यवाद करती हूँ । ख़ुद कंप्यूटर पर नहीं काम करती हूँ इस लिये आपको जवाब नहीं दे पाती हूँ पर आप की हर टिपण्णी को पढ़ती जरुर हूँ .
डॉ मंजुलता सिंह
मील का पत्थर
कोरे कागज़ पर उतरने को
कुलबुलाते हैं अक्षर ।
कहते हैं ,
उम्र का बीता हुआ हर वर्ष
जिन्दगी के सफर का
एक मील पत्थर हैं ।
न जाने कौन सा पत्थर होगा
जिसके आगे , और पत्थर नहीं होगे ।
4 comments:
बहुत खूब!
आईये जानें .... मन क्या है!
आचार्य जी
गूढ़ व दार्शनिक ।
sundar rachana
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