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Tuesday, March 15, 2011
"देख लूँ तो चलूँ " समीर लाल समीर की पुस्तक की समीक्षा
"देख लूँ तो चलूँ " समीर लाल समीर की पुस्तक की समीक्षा हस्तलिखित हैं । पढ़ें के लिये क्लिक करे और बड़ा करके पढ़े ।
खुशकिस्मत हैं समीर लाल जी, जिनकी किताब की हस्त लिखित समीक्षा के लिए, आपने इस उम्र में समय दिया ! इस सक्रियता के लिए कृपया शुभकामनायें स्वीकार करें ! समीर लाल जी को बधाई
हस्तलिखित समीक्षा सभी पाठकों और विशेष रूप से समीरजी के लिए सुंदर उपहार है.... ..... समीर जी की लेखनी के आयामों को सुंदरता से विश्लेषित किया है आपने....आभार
3 comments:
खुशकिस्मत हैं समीर लाल जी, जिनकी किताब की हस्त लिखित समीक्षा के लिए, आपने इस उम्र में समय दिया ! इस सक्रियता के लिए कृपया शुभकामनायें स्वीकार करें !
समीर लाल जी को बधाई
संस्कृतियों के अन्तर के द्वन्द को बखूबी दिखाया है इस पुस्तक में।
हस्तलिखित समीक्षा सभी पाठकों और विशेष रूप से समीरजी के लिए सुंदर उपहार है.... ..... समीर जी की लेखनी के आयामों को सुंदरता से विश्लेषित किया है आपने....आभार
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